69000 शिक्षक भर्ती मामला: 2018 से 2026 तक की पूरी टाइमलाइन
69000 सहायक अध्यापक भर्ती का विज्ञापन दिसंबर 2018 में निकला था। लगभग आठ साल बाद भी इस मामले में अंतिम फ़ैसला नहीं आया है। करीब 67,867 शिक्षक सेवा में हैं, जबकि हज़ारों अन्य अभ्यर्थी अब भी इंतज़ार कर रहे हैं।
इस लेख में कोई तर्क या राय नहीं है। इसमें सिर्फ़ यह बताया गया है कि क्या हुआ, किस क्रम में हुआ, और हर तथ्य कहाँ से लिया गया है। तथ्य 9 अक्टूबर 2026 तक के हैं। आगे की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा आदेश ज़रूर देखें।
भर्ती: 2018 से 2020
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 28 जून 2018 | NCTE की अधिसूचना: बी.एड. धारक प्राथमिक शिक्षक पदों के लिए पात्र, 6 महीने के ब्रिज कोर्स की शर्त के साथ |
| 1 दिसंबर 2018 | ATRE-2019 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का शासनादेश। इसमें NCTE अधिसूचना के तहत पात्र अभ्यर्थियों को शामिल किया गया |
| 5 दिसंबर 2018 | ATRE-2019 का विज्ञापन: सहायक अध्यापक के 69,000 पद |
| 6 जनवरी 2019 | परीक्षा हुई |
| 7 जनवरी 2019 | अर्हता अंक तय: अनारक्षित के लिए 65% (150 में 97), आरक्षित के लिए 60% (150 में 90) |
| 24 जनवरी और 7 मार्च 2019 | 23वें और 24वें संशोधन से बी.एड. को उ.प्र. बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 में जोड़ा गया |
| 12 मई 2020 | परिणाम: 1,46,060 अभ्यर्थी उत्तीर्ण |
| अक्टूबर और नवंबर 2020 | दो सूचियाँ (31,277 और 36,590): कुल 67,867 नियुक्त। अनुसूचित जनजाति (ST) के 1,133 पद खाली रहे |
| 18 नवंबर 2020 | सुप्रीम कोर्ट, Ram Sharan Maurya v. State of U.P.: कट-ऑफ़ सही ठहराया गया। कोर्ट ने कहा कि बी.एड. अभ्यर्थियों को "rightly allowed to participate" किया गया, यानी उन्हें भाग लेने देना सही था |
आरक्षण का विवाद: 2020 से 2024
शिकायत क्या थी: आरक्षित वर्ग के जिन अभ्यर्थियों के अंक सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों जितने थे, उन्हें अनारक्षित (ओपन) श्रेणी में गिनने के बजाय आरक्षित सीटों पर ही रखा गया। इससे आरक्षित वर्ग के बाकी अभ्यर्थियों के लिए सीटें कम बचीं।
राज्य की स्वीकारोक्ति: राज्य सरकार ने माना कि आरक्षण लागू करने में गलती हुई। मई 2022 में उसने हलफ़नामे में कहा कि क्षैतिज (horizontal) और ऊर्ध्वाधर (vertical) आरक्षण गलत क्रम में लागू किए गए।
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 5 जनवरी 2022 | राज्य ने 6,800 आरक्षित अभ्यर्थियों की अतिरिक्त सूची जारी की (5,660 OBC, 1,041 SC, 99 दिव्यांग), लंबित याचिकाओं के अधीन। इसके बाद न काउंसलिंग हुई, न ज़िला आवंटन |
| 27 जनवरी 2022 | इलाहाबाद हाईकोर्ट (न्यायमूर्ति राजन रॉय) ने इस पर रोक लगाई: विज्ञापित 69,000 पदों से अधिक पर नियुक्ति नहीं हो सकती |
| 13 मार्च 2023 | एकल न्यायाधीश ने 6800 की सूची रद्द की और 2020 की सूची संशोधित करने का आदेश दिया |
| 13 अगस्त 2024 | खंडपीठ (विशेष अपील संख्या 172/2023): 2020 की सूची और 6800 की सूची को अलग रखकर 69,000 की नई सूची 3 महीने में बनाई जाए |
बी.एड. का सवाल: 2023 से 2024
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 11 अगस्त 2023 | सुप्रीम कोर्ट, Devesh Sharma v. Union of India: बी.एड. प्राथमिक शिक्षक के लिए योग्यता नहीं है। 2018 की NCTE अधिसूचना रद्द |
| 8 अप्रैल 2024 | स्पष्टीकरण: 11 अगस्त 2023 से पहले नियुक्त बी.एड. शिक्षक सुरक्षित रहेंगे, ब्रिज कोर्स की शर्त के साथ। सिर्फ़ चयन ("mere selection") होना काफ़ी नहीं है |
यह सवाल इस मामले में इसलिए अहम है कि अगर आरक्षण सही ढंग से लगाकर नई सूची बनती है, तो उसमें आने वाले कई अभ्यर्थी बी.एड. धारक हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति कभी हुई ही नहीं। 8 अप्रैल 2024 का आदेश उन शिक्षकों की बात करता है जो 11 अगस्त 2023 से पहले नियुक्त हो चुके थे।
सुप्रीम कोर्ट: 2024 से 2026
मुख्य मामला: Ravi Kumar Saxena v. State of U.P., SLP(C) संख्या 21273/2024। इसके साथ लगभग 60 याचिकाएँ जुड़ी हैं।
| तारीख | पीठ | क्या हुआ |
|---|---|---|
| 9 सितंबर 2024 | मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़, न्या. पारदीवाला, न्या. मिश्रा | नोटिस जारी। नई सूची बनाने के कदम फ़िलहाल रोके गए ("shall be held in abeyance") |
| 18 नवंबर 2025 | न्या. दत्ता, न्या. मसीह | आंशिक सुनवाई |
| 4 फ़रवरी 2026 | न्या. दत्ता, न्या. मसीह | आदेश में दर्ज: "We have indicated our mind", यानी कोर्ट ने राज्य के वकील को अपना रुख बता दिया |
| 19 मई 2026 | न्या. दत्ता, न्या. मसीह | राज्य ने कहा कि वह नई सूची में आने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त करने को तैयार है। शर्तें: रिक्तियाँ हों, न्यूनतम योग्यता हो, और इसे नज़ीर न माना जाए |
| 20 जुलाई 2026 | — | राज्य ने हलफ़नामा दाखिल किया, जिसके साथ 8,270 नामों की दोबारा गणना की गई सूची थी |
| 28 जुलाई 2026 | न्या. दत्ता, न्या. नागू | कोर्ट तय करेगा कि अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल हो या गुण-दोष पर सुनवाई |
| 4 अगस्त 2026 | न्या. भट्टी, न्या. अंजारिया | नई पीठ |
| 9 सितंबर 2026 | न्या. भट्टी, न्या. अंजारिया | मामलों को आठ श्रेणियों में बाँटा गया |
| 16, 22 से 24, 29 और 30 सितंबर 2026 | न्या. भट्टी, न्या. अंजारिया | श्रेणीवार सुनवाई |
| 6 अक्टूबर 2026 | — | सुनवाई जारी रही |
| 7 अक्टूबर 2026 | — | एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार इस दिन भी सुनवाई हुई |
इस तालिका के बारे में चार बातें ध्यान रखें:
- 9 सितंबर 2024 के आदेश ने सिर्फ़ नई सूची बनाने की प्रक्रिया रोकी थी। हाईकोर्ट के पूरे फ़ैसले पर रोक नहीं लगी, और 6800 की सूची बहाल नहीं हुई।
- 2024 और 2025 की कई तारीख़ों पर (23 सितंबर 2024, 27 नवंबर 2024, 19 दिसंबर 2024, 11 फ़रवरी 2025) मामले की सुनवाई नहीं हो पाई। इन तारीख़ों के लिखित आदेश उपलब्ध नहीं हैं।
- 6 और 7 अक्टूबर 2026 की पीठ यहाँ खाली छोड़ी गई है, क्योंकि उपलब्ध रिपोर्टों में न्यायाधीशों के नाम एक जैसे नहीं मिले।
- 8,270 का आँकड़ा और कट-ऑफ़ (अनारक्षित 69.46, OBC 65.92, SC 60.14, ST 56.09) हलफ़नामे के संलग्नक और समाचारों से लिए गए हैं, किसी अदालती आदेश से नहीं।
अभी स्थिति क्या है
- अंतिम फ़ैसला नहीं आया है। सुनवाई पूरी होने की कोई तारीख़ घोषित नहीं है।
- नई सूची बनाने पर रोक जारी है।
- समाचार रिपोर्टों के अनुसार राज्य का कहना है कि किसी कार्यरत शिक्षक को नहीं हटाया जाएगा।