जुलाई में समझौते की बात, अगस्त में बेंच बदली, अब सुनवाई 18 नवंबर तक टली: इंतज़ार की क़ीमत कौन चुका रहा है?
13 अक्टूबर 2026 को 69000 शिक्षक भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट की सूची में था, पर सुनवाई नहीं हुई। अगली तारीख़ 18 नवंबर 2026 है। यानी 36 दिन का एक और इंतज़ार।
यह लेख तीन बातें एक साथ रखता है: जुलाई में विवाद ख़त्म होने के कितना क़रीब था, अगस्त में क्या बदला, और अब देरी कहाँ से आ रही है। पूरा घटनाक्रम टाइमलाइन वाले लेख में है।
13 अक्टूबर को क्या हुआ
- मामला न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ के सामने, कोर्ट नंबर 14 में, आइटम नंबर 21 पर सूचीबद्ध था।
- अभ्यर्थियों के एक ब्लॉग के लाइव अपडेट के अनुसार दोपहर 12 बजे के बाद तक कोर्ट आइटम 10 और 11 पर था। 69000 का नंबर उस समय तक नहीं आया था।
- सुनवाई नहीं हुई। अगली तारीख़ 18 नवंबर 2026 है।
इस लेख के लिखे जाने तक 13 अक्टूबर का लिखित आदेश हमें नहीं मिला है। 18 नवंबर की तारीख़ अभ्यर्थियों को कोर्ट से मिली जानकारी पर आधारित है। आदेश आने पर यह लेख अपडेट किया जाएगा।
एक बात साफ़ रहे: सूची में नंबर न आना किसी पक्ष के ख़िलाफ़ फ़ैसला नहीं है। उस दिन कोर्ट के पास समय नहीं बचा, बस इतना।
जुलाई: समझौते की बात कहाँ तक पहुँची थी
| तारीख़ | रिकॉर्ड में क्या है |
|---|---|
| 4 फ़रवरी 2026 | कोर्ट ने राज्य के वकील को अपना रुख़ बताया |
| 19 मई 2026 | राज्य नई सूची में आने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त करने को "ready and willing" |
| 20 जुलाई 2026 | राज्य का हलफ़नामा, 8,270 नामों की सूची के साथ |
| 28 जुलाई 2026 | कोर्ट ने कहा कि वह तय करेगा कि विवाद ख़त्म करने के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल हो या गुण-दोष पर सुनवाई |
समझौता हुआ नहीं था। वह विचाराधीन था। पर जुलाई के अंत में मेज़ पर एक ठोस प्रस्ताव था और कोर्ट उसे एक रास्ते के रूप में देख रहा था।
अगस्त: बेंच बदली
- 28 जुलाई 2026 तक पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता कर रहे थे।
- 4 अगस्त 2026 से मामला न्यायमूर्ति भट्टी और न्यायमूर्ति अंजारिया की पीठ के सामने है।
- इसका कारण किसी आदेश या आधिकारिक बयान में नहीं बताया गया।
दो बातें साथ में कहना ज़रूरी है। 19 मई के आदेश में ही लिखा था कि मामला "not part-heard" है और "the regular Bench" के सामने सूचीबद्ध हो। और कौन-सा मामला किस पीठ के पास जाएगा, यह मुख्य न्यायाधीश का प्रशासनिक अधिकार है। यानी यह एक सामान्य रोस्टर बदलाव भी हो सकता है। हम किसी न्यायाधीश की नीयत पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। इस पर विस्तार से: समझौते के चरण में बेंच क्यों बदली गई?
नई पीठ ने मामले को टाला नहीं। उसने 9 सितंबर को मामलों को आठ श्रेणियों में बाँटा और 8, 9, 16, 22 से 24, 29 और 30 सितंबर तथा 6 अक्टूबर को सुनवाई की। पर सुनवाई अब गुण-दोष पर, नए सिरे से चल रही है। जो रास्ता जुलाई में छोटा दिख रहा था, वह लंबा हो गया।
अब देरी कहाँ से आ रही है
देरी की पहली जड़ 2020 की वह गलती है जिसे राज्य ख़ुद मान चुका है। इस पर अलग लेख है: देरी राज्य की गलती से शुरू हुई। पर 13 अक्टूबर की देरी उस गलती से नहीं, अदालत की कतार से आई है।
- लंबित मामले: अगस्त 2026 के अंत में सुप्रीम कोर्ट में 94,639 मामले लंबित थे (राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड का आँकड़ा)।
- एक दिन की सूची: एक पीठ के सामने एक दिन में दर्जनों मामले लगते हैं। जो मामला सूची में नीचे है और जिसे घंटों की बहस चाहिए, उसका नंबर अक्सर नहीं आता। 13 अक्टूबर को यही हुआ।
- छुट्टियाँ: 13 अक्टूबर से 18 नवंबर के बीच 36 दिन हैं। इनमें दशहरा (19 से 24 अक्टूबर) और दीवाली (9 से 14 नवंबर) की छुट्टियाँ हैं। कोर्ट के कामकाजी दिन लगभग 15 ही बचते हैं।
- बहस बाक़ी है: 30 सितंबर तक आरक्षित वर्ग के प्रतिवादी और राज्य अपनी पूरी बहस नहीं कर पाए थे। 6 अक्टूबर को कोर्ट ने वकीलों से कहा कि एक ही दलील न दोहराएँ (ब्लॉग रिपोर्टों के अनुसार)। कितने दिन की बहस बाक़ी है, यह किसी स्रोत में नहीं है।
यह सवाल सिर्फ़ 69000 का नहीं है। जब 94 हज़ार से ज़्यादा मामले कतार में हों, तो हर मामला किसी और मामले का समय लेता है। पर जिस मामले में हज़ारों परिवार लगभग आठ साल से इंतज़ार कर रहे हैं और बहस बीच में है, उसके लिए तय तारीख़ें माँगना अनुचित नहीं है।
इंतज़ार की क़ीमत कौन चुका रहा है
देरी किसी पक्ष की हार नहीं है। पर उसकी क़ीमत बराबर नहीं बँटती।
- बाहर रह गए अभ्यर्थी: विज्ञापन दिसंबर 2018 में निकला, परीक्षा जनवरी 2019 में हुई। जो उस समय गलत ढंग से बाहर रह गए, वे अब भी बाहर हैं। हर महीना वेतन, वरिष्ठता और उम्र का एक और महीना ले जाता है।
- कार्यरत शिक्षक: जो 2020 से पढ़ा रहे हैं, वे भी नहीं जानते कि नई सूची बनी तो उनका क्या होगा।
- बी.एड. अभ्यर्थी: इंतज़ार के दौरान 11 अगस्त 2023 को बी.एड. पर कानून बदल गया। इस पर: एक ही परीक्षा, एक ही डिग्री, अलग-अलग नतीजा।
- स्कूल और बच्चे: जो पद विवाद में अटके हैं, उन पर नियुक्ति नहीं हो पा रही।
राज्य और अदालत के लिए यह एक फ़ाइल है। अभ्यर्थी के लिए यह उसकी नौकरी की उम्र है।
अभ्यर्थी क्या माँग रहे हैं
- 18 नवंबर को मामला सूची में ऊपर लगे, ताकि नंबर आए।
- बाक़ी बहस के लिए लगातार तारीख़ें और समयबद्ध कार्यक्रम तय हो।
- बेंच बदलने का कारण सार्वजनिक किया जाए।
- फ़ैसला आए, चाहे जिस पक्ष में आए।
ये माँगें हैं। कोर्ट इन्हें मानेगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है।